Romantic True Love Gulzar Shayari
कभी-कभी ना, सच्चा प्यार किताबों या फिल्मों में नहीं मिलता, बल्कि किसी के एक छोटे से ख़याल, किसी की नज़रों की चुप्पी, या किसी की आवाज़ में छुपे सुकून में मिल जाता है। सच कहूँ तो, जब मैंने पहली बार गुलज़ार साहब की शायरी पढ़ी थी, ऐसा लगा मानो मेरी ही धड़कनों को उन्होंने अल्फ़ाज़ दे दिए। उनकी हर पंक्ति जैसे दिल की गहराइयों को खोल देती है—कभी मोहब्बत का मासूम चेहरा, कभी जुदाई का खामोश दर्द, तो कभी यादों की अनकही सरगम।
दिल की गहराइयों में उतरती Romantic Shayari
दुपट्टा क्या रख लिया सर पे, वो दुल्हन नजर आने लगी,
उसकी तो अदा हो गयी, जान हमारी जाने लगी.
प्यार में कितनी बाधा देखि,
फिर भी कृष्ण के संग राधा देखि.
जो उम्र भर भी न मिल सके,
उसे उम्र भर चाहना इश्क हे.
तू कितनी भी खुबसुरत क्यूँ ना हो ए ज़िंदगी
खुशमिजाज़ दोस्तों के बगैर तु अच्छी नहीं लगती..!!
उसकी ख़ामोशी में भी बात होती है,
वो जब देखता है, तो रात होती है।
मेरे अल्फ़ाज़ उस तक जा नहीं पाए,
उसकी आँखों ने सब कुछ कह दिया था।
पसंद तो ये दुनियाँ भी नहीं आती कभी कभार…
पर उस एक पल के लिए हम मर तो नहीं सकते…!!
तेरे बिना तन्हा लगता है आसमान,
तेरे साथ हर पल है एक मेहमान।
तुमसे मिली जो जिंदगी, हमने अभी बोई नहीं..!
तेरे सिवा कोई न था, तेरे सिवा कोई नहीं..!!
जिंदगी यूँ हुई बसर तन्हा…!
काफिला साथ और सफर तन्हा..!!
क्योंकि हम तो आवारा थे… तो ये फरमान सुनाया गया…
की बेरोज़गारी का इश्क़ बाद में मुकम्मल नहीं होता…!!
हाथ छुटे तो भी रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक़्त की शाख से रिश्ते नहीं तोड़ा करते!
मुझसे तुम बस मोहब्बत कर लिया करो,
नखरे करने में वैसे भी तुम्हारा कोई जवाब नहीं!
अगर कसमें सब होती,
तो सबसे पहले खुदा मरता!
बिना तेरे रातें क्यों लंबी लगती हैं, कभी तेरा गुस्सा,
कभी तेरी बातें, क्यों अच्छी लगती हैं।
इक जरा चेहरा उधर कीजिए इनायत होगी,
आप को देख कर बड़ी देर से मेरी सांसें रुकी हैं।
Gulzar Shayari on True Love Connection
इश्क उसे भी था, इश्क मुझे भी था,
कम्बख्त, उम्र बिच में आगई.
मेरा हक़ नहीं है तुम पर,ये जानता हु में, फिर भी न जाने क्यों,
दुआओ में तुझको मांगना, अच्छा लगता हे.
हसरते पूरी न हो तो, न सही,
पर ख्वाब देखना कोई, गुनाह तो नहीं.
जो रिश्ता था लम्हों का, उम्र भर का बन गया,
वो मुस्कुराया क्या, मेरा जहाँ बदल गया।
तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान,दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे…
ख़त लिखे थे जो तुमने कभी प्यार में,उसको पढते रहे और जलाते रहे…
उसकी बात का असर कुछ ऐसा था,
दिल भी चुप था, और आँसू भी गीला था।
मौसम भी कभी उस जैसा लगता है,
कभी नरम सा, कभी बरसात सा लगता है।
मेरे बगैर क्या होता मेरा ये सोचना भी मुश्किल है…
सब नें भरोसा तोड़ा है एक मेरे मुझको छोड़कर…!!
ये तुमने ठीक कहा है, तुम्हें मिला ना करू
मगर मुझे ये बता दो कि क्यों उदास हो तुम?
तेरे-करम-तो-हैं इतने कि याद हैं अब तक,
तेरे सितम हैं कुछ इतने कि हमको याद नहीं
बेशूमार मोहब्बत होगी उस बारिश की बूँद को इस ज़मीन से,
यूँ ही नहीं कोई मोहब्बत मे इतना गिर जाता है!
किसी तरह कोई उन्हें ये पैग़ाम दे दे…
हम मरे नहीं उनकी बेवाफ़ाई के बाद भी…!
तुम्हे जो याद करता हुँ, मै दुनिया भूल जाता हूँ ।
तेरी चाहत में अक्सर, सभँलना भूल जाता हूँ ।
वो मोहब्बत भी तुम्हारी थी नफरत भी तुम्हारी थी, हम अपनी वफ़ा
का इंसाफ किससे माँगते.. वो शहर भी तुम्हारा था वो अदालत भी तुम्हारी थी.
तुम्हे जो याद करता हुँ, मै दुनिया भूल जाता हूँ ।
तेरी चाहत में अक्सर, सभँलना भूल जाता हूँ ।
तन्हाई अच्छी लगती है सवाल तो बहुत करती पर,.
जवाब के लिए ज़िद नहीं करती..
ये माना इस दौरान कुछ साल बीत गए हैं, फिर भी आंखों में तुम्हारा
चेहरा समाए हुए हैं, किताबों पर धूल जम जाने से कहानी कहां बदलती है।
तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी हैं
बहुत दिन हो गए देखा नहीं न खत मिला कोई, बहुत दिन
हो गए सच्ची, तेरी आवाज की बौछार में भीगा नहीं हूं मैं।
खता उनकी भी नहीं यारो वो भी क्या करते,
बहुत चाहने वाले थे किस किस से वफ़ा करते !
जब भी दिल तुझको याद करता है, तू मेरे जिस्म से गुजरता है,
आंखों में क्यों रखा हुआ है तू सांस में क्यों रुका हुआ है।
Romantic Shayari That Feels Like Healing
दूसरा मौका सिर्फ, मोहब्बत को दिया जाता हे,
जिस शख्स से, मोहब्बत थी उसे नहीं.
तेरा नाम लेने का जज़्बा कुछ और है,
जैसे ख़ुशबू हो किसी फूल के पास।
शायर बनना बहुत आसान हैं…!
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए…!!
गुलज़ार शायरी इन हिंदी Sad जो जाहिर करना पड़े,
वो दर्द कैसा, और जो दर्द न समझ सके, वो हमदर्द कैसा.
हर शाम तेरी यादों का गीत बन जाती है,
रात भर वही एक बात बन जाती है।
कोई पूछ रहा हे मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत…
मुझे याद आ रहा हैं तेरे हल्के से मुस्कुराना…
गुलज़ार एक अहसास बड़ी नादानी से पूछा उन्होंने,क्या अच्छा
लगता हे, हमने भी धीरे से कह दिया, एक झलक आपकी.
उसकी मुस्कान ने दिल को छू लिया,
क्या कहूँ, ज़िंदगी को रौशन कर दिया।
मेरे-तेरे इश्क़ की छाँव मे, जल-जलकर! काला ना पड़ जाऊ कहीं !
तू मुझे हुस्न की धुप का एक टुकड़ा दे…!
अंदाज़ा मत लगाइए की आखिर में क्या होगा…
चलनें का शौक़ हो शख़्स बहुत दूर निकल जाता है…!!
उसने कागज की कई कश्तिया पानी उतारी और,
ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे।
कुछ मेरे फ़ैसलों में ख़राबी रही होगी ही…
वरना ये हाल तो सबका नहीं होता है…!!
बिना बात भी बातचीत होती है साहब…
मैनें बैठ कर देखा है आज उसके बगल वाली कुर्सी पर…!!
मैं दिया हूँ! मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं,
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं।
मैंने दबी आवाज़ में पूछा? मुहब्बत करने
लगी हो? नज़रें झुका कर वो बोली! बहुत।
कयामत तक याद करोगे किसी ने दिल लगाया था,
एक होने की उम्मीद भी न थी फिर भी पागलों की तरह चाहा था।
आइना देख कर तसल्ली हुई,
हम को इस घर में जानता है कोई।
हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते
सब तरह की दीवानगी से वाकिफ हुए हम,
पर मा जैसा चाहने वाला जमाने भर में ना था !
मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता,
हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है।
इस दिल में बस कर देखो तो ये शहर बड़ा पुराना है
हर साँस में कहानी है हर साँस में अफ़साना है
Gulzar’s Pyar Bhari Shayari in Modern Emotions
Gulzar Shayari On Ishq मोहब्बत थी तो,
चाँद था, उतर गई तो, दाग भी दिखने लगे.
न हक़ दो इतना की, तकलीफ हो तुम्हे,
न वक्त दो इतना की, गुरुर हो हमें.
तेरी ख़ुशी में मेरी जान बसी है,
तुझसे जुदा होकर भी तू पास ही है।
गुलजार की शायरी जिंदगी सालो बाद मिले वो, गले लगकर
रोने लगे, जाते वक्त जिसने कहा था, तुम्हारे जैसे हजार मिलेंगे.
तुम आए तो हर शय का मतलब समझा,
इश्क़ क्या होता है, ये दिल ने जाना।
उनकी आँखों में लिखी थी कहानी मेरी,
मैं पढ़ न सका, पर महसूस किया सब कुछ।
अपने होठों से चुन रहा हूँ, तुम्हारी सांसो की आयतो को
की जिसम के इस हसीन काबे पे ,रूह सजदे बिछा रही है।
इक उर्म हुई मैं तो हंसी भूल चुका हूँ,
तुम अब भी मेरे दिल को दुखाना नही भूले ।
ज़िन्दगी उसकी जिस की मौत पे ज़माना अफ़सोस करे ग़ालिब ,
यूँ तो हर शक्श आता हैं इस दुनिया में मरने कि लिए ..!!
ख़बर अंदर की है पैसा ज़रूरी है बहुत…
कहनें में अच्छा नहीं लगता तो लोग नहीं कहते…!!
तकलीफ खुद ही कम हो गई,
जब अपनों से उम्मीद कम हो गई ।
तस्वीरें लेना भी जरूरी है जिंदगी में साहब
आईने गुजरा हुआ वक्त नहीं बताया करते!!
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है
तजुर्बा कहता है रिश्तों में फैसला रखिए,
ज्यादा नजदीकियां अक्सर दर्द दे जाती है…
आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है..!
जो भी छिपा रखा है मन में लुटा देने का मन है..!!
दौलत नहीं शोहरत नहीं,न वाह चाहिए
“कैसे हो?” बस दो लफ़्जों की परवाह चाहिए
खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है
तुमसे मिली जाे जिंदगी, हमने अभी बोई नहीं,
तेरे सिवा कोई न था, तेरे सिवा कोई नहीं।
रात को भू कुरेद कर देखो,
अभी जलता हो कोई पल शायद!
तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं,
रात भी आई और चांद भी था, मगर नींद नहीं।
महफ़िल में गले मिलकर वह धीरे से कह गए,
यह दुनिया की रस्म है, इसे मुहोब्बत मत समझ लेना
मैं ज़ोया हूँ… पिछली बार मैंने “Husband Love Shayari in English” लिखी थी, और अब तुम्हारे लिए romantic true love गुलज़ार शायरी का जादू लायी हूँ। कभी-कभी सोचती हूँ, अगर गुलज़ार साहब की शायरी न होती तो मोहब्बत को कैसे समझते? शायद हमें पता ही न चलता कि प्यार सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं, बल्कि एक सफ़र है—कभी मीठा, कभी कड़वा, लेकिन हमेशा यादगार। तुम भी अगर इस वक़्त किसी सच्चे प्यार के सफ़र से गुज़र रहे हो, चाहे वो अधूरा हो या पूरा, गुलज़ार की शायरी तुम्हें ज़रूर अपना हमसफ़र लगेगी।


