Gulzar Shayari On Love

Gulzar Shayari On Love

Gulzar Shayari on Love — वो अल्फ़ाज़ जो महक छोड़ जाते हैं

कभी-कभी ना… मोहब्बत सुनाई नहीं देती, बस महसूस होती है।
जैसे किसी ने कानों में नहीं… दिल में कविता फुसफुसा दी हो।
Gulzar sahab की शायरी भी वैसी ही है —
थोड़े शब्द, लेकिन दिल में उम्रभर गूंजते रहते हैं।

जब प्यार शब्दों से नहीं, नज़रों से लिखा जाए

पलकों पे ठहरी हुई बारिश की बूंदें,
ना गिरें… क्योंकि कोई उन्हें देख रहा है।”
गुलज़ार की पंक्तियाँ बस इतनी-सी,
पर उस एक लफ़्ज़ में पूरी मोहब्बत सिमट जाती है।

तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी हैं

शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है

एक बार तो यूँ होगा कि थोड़ा सा सुकून होगा,
ना दिल में कसक होगी और ना सर पे जूनून होगा

तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं,
रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं

दौलत नहीं शोहरत नहीं,न वाह चाहिए
“कैसे हो?” बस दो लफ़्जों की परवाह चाहिए

कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है

आइना देख कर तसल्ली हुई,
हम को इस घर में जानता है कोई।

वो मोहब्बत भी तुम्हारी थी नफरत भी तुम्हारी थी,
हम अपनी वफ़ा का इंसाफ किससे माँगते..
वो शहर भी तुम्हारा था वो अदालत भी तुम्हारी थी.

बेशूमार मोहब्बत होगी उस बारिश की बूँद को इस ज़मीन से,
यूँ ही नहीं कोई मोहब्बत मे इतना गिर जाता है!

तुम्हे जो याद करता हुँ, मै दुनिया भूल जाता हूँ ।
तेरी चाहत में अक्सर, सभँलना भूल जाता हूँ ।

मुझसे तुम बस मोहब्बत कर लिया करो,
नखरे करने में वैसे भी तुम्हारा कोई जवाब नहीं!

यादों के मौसम में गुलज़ार की महक

मौसम बदलते हैं, लेकिन एक सच्चा प्यार…
वो गुलाब की तरह सूख भी जाए,
तो भी उसकी खुशबू सालों तक ज़िंदा रहती है।

हाथ छुटे तो भी रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक़्त की शाख से रिश्ते नहीं तोड़ा करते!

दुपट्टा क्या रख लिया सर पे,
वो दुल्हन नजर आने लगी,
उसकी तो अदा हो गयी,
जान हमारी जाने लगी.

जो उम्र भर भी न मिल सके,
उसे उम्र भर चाहना इश्क हे.

मेरा हक़ नहीं है तुम पर,
ये जानता हु में,
फिर भी न जाने क्यों,
दुआओ में तुझको मांगना,
अच्छा लगता हे.

बड़ी नादानी से पूछा उन्होंने,
क्या अच्छा लगता हे,
हमने भी धीरे से कह दिया,
एक झलक आपकी.

दूसरा मौका सिर्फ,
मोहब्बत को दिया जाता हे,
जिस शख्स से,
मोहब्बत थी उसे नहीं.

जो जाहिर करना पड़े,
वो दर्द कैसा,
और जो दर्द न समझ सके,
वो हमदर्द कैसा.

सारी उम्र तुझे मेरी कमी रही हे,
रब करे तेरी उम्र बहुत लम्बी रहे.

न हक़ दो इतना की,
तकलीफ हो तुम्हे,
न वक्त दो इतना की,
गुरुर हो हमें.

चुप्पियों में छिपा इज़हार

प्यार जताना ज़रूरी नहीं,
कभी-कभी चुप रहना ही सबसे गहरी मोहब्बत होती है।

सालो बाद मिले वो,
गले लगकर रोने लगे,
जाते वक्त जिसने कहा था,
तुम्हारे जैसे हजार मिलेंगे.

राधा सी सादगी हे तुम मे,
इसलिए पसंद हो,
वरना खूबसूरत तो,
यहाँ गोपिया भी हे.

सबके सामने हाथ पकड़,
लेता हे तुम्हारा,
ये चूड़ीवाला भी एक दिन ,
मार खायेगा मुझसे.

जरुरी नहीं हर ख्वाब,
पूरा हो,
सोचा तो उसे ही जाता हे,
जो अधूरा हो.

बार बार ज़ुल्फो को,
कानों से हटा रहे हे वो,
लाए हे हम उनके लिए झुमके,
सबको बता रहे हे वो.

पहली मोहब्बत,
मुकदमे की तरह होती हे,
ना खतम होती हे,
ना इंसान को,
बाइज्जत बरी करती हे.

पहली बार देखा था उसे,
गुस्सा करते हुए,
अच्छा लगा था उसका,
मुझपे हक् जताते हुए.

मेरे लिए मायने मोहब्बत,
के बस इतने है,
कि तुम खुश रहो तो,
मैं भी खुश हू.

जा जाने क्यों रेत की
तरह निकल जाते है
हाथों से वो लोग,
जिन्हें जिंदगी समझकर हम
कभी खोना नहीं चाहते.

जब अल्फ़ाज़, दवा बन जाएं

कई ज़ख्म ऐसे होते हैं,
जो सिर्फ़ किसी के लिखे दो लफ़्ज़ से भर जाते हैं।
और Gulzar sahab… वो लफ़्ज़ बनाने में उस्ताद हैं।

इश्क उसी से करो
जिसमें खामियां बेशुमार हो,
ये खूबियों से भरे चेहरे
इतराते बहुत है.

आग लगा दी,
आज उस किताब को मैंने,
जिसमें लिखा था मोहब्बत,
अगर सच्ची हो तो मिलती जरूर है.

खुशकिस्मत है नफरत उनकी,
जिस पर सिर्फ हमारा हक़ है,
वरना प्यार तो वो सारी दुनिया को करते है.

तुम इसलिए किसी को चाहते हो कि,
वो भी तुम्हें चाहे,
तो तुम्हारी चाहत व्यर्थ हुई,
क्योंकि चाहत में कोई चाहत नहीं होती.

अच्छा नहीं लगता,
बार-बार किसी को अपनी याद दिलाना,
अगर अहमियत होगी तो लोग खुद याद कर लेंगे.

कोई फर्क नहीं पड़ता कि,
तुमने किसे चाहा और कितना चाहा,
हमें तो ये पता है कि,
हमने तुम्हें चाहा और बेपनाह चाहा.

सुनो बेपनाह मोहब्बत हे तुमसे,
अब तुम पास हो या दूर,
क्या फर्क पड़ता हे.

अगर मोहब्बत उनसे ना मिले,
जिनको आप चाहते हो,
तो मोहब्बत उनसे जरूर कर लेना,
जो आपको चाहते हे.

हमने भी एक ऐसे इंसान को चाहा,
जिसे भूलना हमारे बस में नही,
और पाना किस्मत में नहीं.

कैसे ना हो,
इश्क उनकी सादगी पर ए-खुदा,
खफ़ा है हमसे मगर करीब बैठे है.

Main Zoya hoon…
पिछली बार मैंने “Love Shayari Punjabi” लिखी थी,
और अब Gulzar sahab की मोहब्बत से भीगी ये बातें लेकर आई हूँ।
शब्दों में महकती ये मोहब्बत… शायद आपके दिल तक पहुँच जाए। 💌

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